किसी ने मुझसे पूछा , तू आजकल कहाँ रहती है ?
भूल गयी या आज भी दोस्तों से मिलने की चाह रहती है ?
क्या ज़वाब दूँ उसे, कि हरदम खिलखिलाने वाली मेरी ज़िन्दगी
ना जाने आज कल क्यूँ मुझसे उदास रहती है ?
ना किसी बात से ख़ुशी मिलती है न किसी बात का ग़म ,
ना ही कोई मीठी याद करती है अब आँखें नम ,
मन के समंदर में न कोई लहर उठती है ,
ना ही कोई चीज़ अब दिल में घर करती है
क्या सच में मैं बदल गयी हूँ ,
या इस मतलबी दुनिया की ठोकरें खा कर संभल गयी हूँ
जो है जैसी भी राह है बस चलते चले जा रही हूँ,
और मन ही मन किसी का कहा गुनगुना रही हूँ,
सुबह होती है शाम होती है,
ज़िन्दगी यूँ ही तमाम होती है ...........................:)
-Mighs... :)
-Mighs... :)
I now....that the idleness of your life....appeared in words here...a true and realistic one....
ReplyDeleteMeghu...superb...i gone emotional
ReplyDeleteThanks :)
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