Bus Yun He....
Thursday, May 10, 2012
माना मेरी ज़िन्दगी कोई खुली किताब नहीं ,
गर कुछ पन्ने पलट सको तो जाने,
माना उसकी लिखावट में कोई मिठास नहीं,
गर भावों को ज़रा भी समझ सको तो जाने,
ये बिखरी हैं, उलझी हैं, तन्हां हैं,
जो समेट कर फिर जिंदा कर सको तो जाने
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