प्यासे खड़े साहिल पर ,
डर है डूब जाने से,
आज वो शख्स क्यूँ याद आ गया,
भुला चुके जिसे ज़माने से,
ना झाँक ले मन में कहीं कोई,
छिप जाए दर्द मेरा मुस्कुराने से ,
क्यूँ खोजने लगे, दबे किताबों में,
पत्ते ग़ुलाब के कुछ पुराने से,
जिस ओर कभी रुख न किया,
आज गुज़रे थे कदम उस मैख़ाने से,
लौट आए खाली हाथ छलका के अश्क,
अँखियों के पैमाने से,
हाँ हैं हम थोड़े नादान कुछ पागल हैं ज़रा दीवाने से।
-mighs :)