Tuesday, October 9, 2012

प्यासे  खड़े साहिल पर ,

डर है डूब जाने से,

आज वो शख्स क्यूँ याद आ गया,

भुला चुके जिसे ज़माने से, 

 

ना झाँक ले मन में कहीं कोई,

छिप जाए दर्द मेरा मुस्कुराने से ,

क्यूँ खोजने लगे, दबे किताबों में,

पत्ते ग़ुलाब के कुछ पुराने से,


जिस ओर कभी रुख न किया,

आज गुज़रे थे कदम उस मैख़ाने  से,

लौट आए खाली हाथ  छलका के अश्क,

अँखियों  के पैमाने से,

 

हाँ हैं हम थोड़े  नादान कुछ पागल हैं ज़रा दीवाने से।    

-mighs :)